बड़ा मसरूफ जमाना हो गया है ग़ज़ल
बड़ा मसरूफ जमाना हो गया है
घर का बच्चा सयाना हो गया है।
आदमी पूँजीवादी हो गया है
गरीबी एक निशाना हो गया है।
वक्त कम है काम है ज्यादा
ये बहाना पुराना हो गया है।
आदमी एक मशीन हो गया है
शहर अब कारखाना हो गया है।
कामयाबी बदलती है ठिकाने
रास्ता अब ठिकाना हो गया है।
तेज रफ्तार में लम्हे बिखरते
पास बैठे जमाना हो गया है।
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